क्या आप जानते है भीष्म पितामह ने विवाह क्यों नहीं किया ?

    

यदि आप धार्मिक पुराणों तथा अनुष्ठानो में विश्वास रखते हैं तो आप भीष्म पितामह को तो जानते ही होंगे! भीष्म पितामह ने कभी विवाह नहीं किया था उन्होंने संपूर्ण जीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया था! परन्तु यदि आप उनके पिछले जन्म के बारे में पढेंगे तो आपको पता चलेगा कि पिछले जन्म में वे वासु थे और विवाहित थे! फिर उन्होंने महाभारत के समय विवाह क्यों नहीं किया आइये जानते हैं!

पुराणों के अनुसार वासु (भीष्म के पिछले जन्म का नाम) देवराज इंद्र के परिचर हुआ करते थे! उसके बाद वासु भगवान् विष्णु के परिचर बन गए थे! देवराज इंद्र की सभा में कुल आठ वासु हुआ करते थे जो कि अलग अलग प्रकृति के तत्वों का प्रतिधिनित्व करते थे! उपनिषदों के अनुसार ये आठ वासु इस प्रकार थे- अग्नि,वायु,पृथ्वी,अन्तरिक्ष,आदित्य,द्योस,चंद्रमास तथा नक्षत्र! इन वासुओ के अन्य नाम इस प्रकार है- अनल,अनिल,धार,अह,प्रत्युष,प्रभाष,ध्रुव और सोम!

रामायण के अनुसार जब ये आठो वासु एक दिन पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे इस दौरान द्योस की पत्नी ने एक बहुत ही सुन्दर गाय देखी और वह अपने पति से आग्रह करने लगी की वह उस गाय को चुरा ले तथा उसके पास ले आयें! पत्नी के आग्रह को द्योस मना नहीं कर पाए! उसने अन्य वासुओं के साथ मिलकर उस गाय को चुरा लिया! वह गाय महर्षि वशिष्ठ की थी!

वशिष्ठ ऋषि ने अपनी शक्तियों के माध्यम से यह पता कर लिया की गाय आठ वासुओं ने चुराई है, उन्होंने सभी वासुओं को श्राप दिया कि उन्हें धरती पर जन्म लेना होगा! जब वासुओं को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने ऋषि से  माफ़ी मांगी,इस पर ऋषि ने उनसे कहा की वे एक वर्ष में अपने श्राप से मुक्त हो जाएँगे परन्तु द्योस को लम्बे समय तक सांसारिक जीवन का कष्ट भोगना होगा!

वासुओं ने गंगा नदी को धरती पर अपनी माँबनने को बोला वे राजी हो गई! गंगा नदी ने इंसान रूपी वेश धारण किया तथा राजा शांतनु की पत्नी बनी! परन्तु उन्होंने शांतनु के सामने ये शर्त रख दी कि वे गंगा को किसी भी कार्य के लिए नहीं रोकेंगे! गंगा ने अपनी सात संतान  होते ही उन्हें पानी में डुबो दिया वचन के अनुसार शांतनु ने उन्हें नहीं रोका और इस तरह सात वासु श्राप से मुक्त हो गए! परन्तु जब गंगा ने अपनी  आठवी संतान  को भी डुबोना चाहा तो शांतनु ने उसका विरोध किया इस तरह भीष्म जीवित रह गए!

भीष्म ने एक श्राप को पूर्ण करने के लिए धरती पर जन्म लिया था इसलिए उन्होंने संसार के मायाजाल में न फसने का निर्णय लिया! इसके आलावा जैसे कि अपने पिछले जन्म में अपनी पत्नी की इच्छा पूरी करने की वजह से ही उन्हें श्राप का सामना करना पड़ा!जब उन्होंने ये सब एक बार भुगत लिया तो वे सांसारिक बन्धनों में नहीं उलझना चाहते थे! वे इस संसार में अपने कर्मो का चक्र पूर्ण कर लेना चाहते थे तथा कोई और कर्त्तव्य शेष नहीं छोड़ना चाहते थे !

भीष्म ने अत्यंत बलशाली तथा अनेक प्रतिभा  का धनी होने के बावजूद एक अकेले मनुष्य का सांसारिक जीवन जिया! पिछले जन्म का श्राप भोग रहे भीष्म को इस जन्म में कुछ भी उनकी भीषण प्रतिज्ञा से डगमग नहीं कर पाया!