Why we offer water to sun (सूर्ये को जल अर्पित क्यों करते है)

    
Why we offer water to sun (सूर्ये को जल अर्पित क्यों करते है)

हमारे शरीर में रंगों का बहुत बड़ी जरूरत है, क्योंकि ये हमारे शरीर के विभिन्न हिस्सों को सुचारु रूप से चलाने के लिए अति महत्वपूर्ण होते है । आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे बॉडी के अलग अलग अंग अलग अलग कलर के होते है जैसे हमारी नसें नीली हैं, हृदय लाल है, गुर्दे और अग्न्याशय भूरा हैं, हड्डियां सफेद हैं, और मस्तिष्क तंत्रिका इंद्रधनुष रंग में हैं।

सूर्य की किरणें सफेद होती हैं, लेकिन जब ये किरणे किसी माध्यम से पारित होती हैं, तो वे अपने मूल रंगों में टूट जाते हैं। जब हम सुबह में विशेष तरीके से उगते हुए सूर्ये को जल अर्पित करते है, तो पानी की परत एक माध्यम के रूप में काम करती हैं, जिससे सूरज की किरणे रंगों के स्पेक्ट्रम में विभाजित हो जाती है और हमारे शरीर में लाभ पहुंचाने के लिए हमारे शरीर में प्रवेश किया जाता है।

यदि आप सूरज को पानी अर्पित करना चाहते हैं, तो आपको इसे सही और निर्धारित तरीके से करना चाहिए। सूर्ये को पानी देते समय आपका चेहरा उगते हुए सूरज की तरफ तथा पानी से भरे हुए एक लोटे की पोजीशन आपकी आँख व् सूरज के बिच में रखें फिर धीरे-धीरे जमीन पर पानी छोड़े, जिससे सूरज की किरणे जमीन पर गिरने वाले पानी की धार के माध्यम से हमारे शरीर के अंगो पर गिरती है। सूरज की किरणें पानी से गुजरते समय अपने मूल रंगों में टूट जाती हैं और हमरे शरीर को शारीरिक रूप से शक्तिशाली व् स्वस्थ बनता है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि पानी के बर्तन को छाती के स्तर पर रखना चाहिए।

इस प्रकार प्राकृतिक स्रोत से ऊर्जा प्राप्त करने से हमारे शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। हिंदू ग्रंथों में कहा गया है कि सूरज की पराबैंगनी किरणें कई घातक रोगों के बैक्टीरिया को नष्ट कर देती हैं। इसलिए, पानी अर्पित करते वक्त एक मंत्र का उच्चारण किया जाता है:

ओम रोगियाम विनासाय देव ज्योति नमस्ते

रोगो के उपचार के अलावा सूर्ये की पूजा करने से आँखों की रोशनी तेज होती है। ज्योतिषशात्र के अनुशार सूर्ये आँख, आत्मा व् पिता का प्रतीक है। इसलिए सूरज को जल अर्पित करने से पुराने पाप नष्ट हो जाते है।