कात्यायनी: मां दुर्गा का षष्ठम स्वरूप

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नवरात्रि के नौ दिन शक्ति पुजा का बडा ही महत्व है। माता दुर्गा के नव स्वरूपो में से छ्ठ्ठे दिन पर माता के कात्यायनी स्वरूप का पुजन किया जाता है। मां कात्यायनी अपने सहज शांत स्वरूप के लिये ख्यातनाम है। जो भी भक्त माता के इस स्वरूप को श्रध्धा और भक्ति से पुजता है माता उस की हर कामना पुर्ण करने में सक्षम है। माता के इस स्वरूप के उत्पत्ति और पुजन की बडी ही मनोहर गाथा है। माता का ये स्वरूप बडा ही मनोहर और सुशील है जो भक्तो के मन को शाता प्रदान करता है। मां का ये स्वरूप षष्ठम दुर्गा के नाम से भी प्रसिध्ध है।

स्वरूप एवं उत्पत्ति:

माता के इस स्वरूप के पीछे एक पौराणिक गाथा है जो हर भक्त को जाननी चाहिये। पुराण काल मे एक ऋषि हुआ करते थे जिनका नाम कत था। उन के ही वंश में ऋषि कात्यायन का जन्म हुआ जिन्हो ने माता दुर्गा की बडी आराधना की। माता ने जब प्रसन्न हो कर उनको वर मांगने को कहा तब उन्हो नें माता को अपने पुत्री के रुप में पाने का वर मांगा जो माता ने स्वीकार किया और कुछ सालो में माता ने अवतार लिया। उन दिनो एक दैत्य महिषासुर का बडा ही त्रास रहता था। ऋषि कात्यायन ने माता का आवाह्न किया और महिषासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।

कात्यायन ऋषि ने कुछ दिन माता की पुजा की और नौ दिन पुजा करने के बाद माता ने दसवें दिन महिषासुर का वध किया। माता का ये स्वरूप वैसे तो बडा ही सहज है पर साथ में वो युध्ध के लिये प्रविष्ट भी प्रतित होती है। उन के इस स्वरूप के चलते ही माता धैर्य और पराक्रम दोनो की अधिष्ठात्री मानी जाती है। माता की चार भुजाएं है जिस में से एक हाथ में कमल पुष्प है और एक हाथ आशिर्वाद मुद्रा में है। उन के एक हाथ में चंद्रहास नामक तलवार है और एक हाथ वरद मुद्रा में स्थित है। इस स्वरूप में भी माता का वाहन सिंह है।

पुजन:

माता कात्यायनी को प्रसन्न कर ने से मन को स्थिरता और शांति मिलती है। वो भक्तो को आशिष देकर निर्भय बनाती है और समस्याओ से मुक्ति प्रदान करती है। माता के इस स्वरूप को पुजने के भक्तो एवं योगीओ में बडी ही महत्ता है। जो योगी अपनी साधना में सिध्धी हांसल करना चाहता हो उस के लिये माता के इस स्वरूप की पुजा अनिवार्य है ताकी माता के इस स्वरूप के पुजन से उन का मन आज्ञाचक्र में स्थिर होता है जो की कुंडलिनी जागृति के लिये बडा ही जरुरी है।

माता इस स्वरूप में बडी ही सौम्य और प्रभावशाली दीखती है। जो भी भक्त माता के इस स्वरूप को विधि विधानो के अनुसार पुजे उन्हें माता के आशिष की प्राप्ति होती है और जिवन सरल और सहज हो जाता है। शक्ति के पुजको में भी इस स्वरूप का पुजन बडा महत्वपुर्ण है क्युं की माता इस स्वरूप में युध्ध प्रविष्ट दीखती है। जो भी मनुष्य माता का इस दिन पुजन करता है उसे धर्म, काम, मोक्ष और पुण्य कर्म की प्राप्ति होती है।

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