क्या आप जानते है मूषक गणेशजी का वाहन कैसा बना ?

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भगवान् गणेश की महिमा से कोई अनजान नहीं है! सभी मांगलिक कार्यो में भगवान् गणेश को सबसे पहले पूजा जाता है! भगवान् गणेश बुद्धि और रिद्धि सिद्धि के देवता  माने जाते है! उनके तर्क को मात देना किसी के बस की बात नहीं है! भगवान श्री गणेश विशालकाय शरीर के हैं परन्तु उनकी सवारी मूषक है! क्या आप जानते हैं कि मूषक गणेश भगवान् का वाहन कैसे बना? आइये जानते हैं|

पुराणों के अनुसार जिस प्रकार भगवान् गणेश तर्क वितर्क करने की कला में माहिर है ठीक उसी प्रकार मूषक भी हर चीज़ को कान्ट छांट कर देता हैं ! मूषक की फुर्ती भी लाजवाब होती है इसीलिए भगवन गणेश ने उसे अपनी सवारी बनाया होगा!

पौराणिक कथा के अनुसार गजमुखासुर नाम का एक दैत्य हुआ करता था! उसने अपनी शक्ति से देवताओं को खूब परेशान किया ! उसे यह वरदान दिया गया था कि वह किसी शस्त्र से पराजित नहीं हो सकता हैं और कोई भी शस्त्र उसे मार नहीं सकता! जब देवताओं को उन्हें हराने का कोई रास्ता नहीं सूझा तो उन्होंने भगवान् गणेश को कहा! देवताओं की पुकार सुनकर गजमुखासुर से गणेश जी ने युद्ध किया ! जब वह किसी शस्त्र से पराजित नहीं हो सका तब गणेश जी ने अपना दांत तोड़ कर उस पर प्रहार किया! यह देख कर वह असुर भागने लगा तभी गणेश जी ने उसे अपना वाहन बना लिया!

इसी के अनुसार एक और कथा प्रसिद्द है एक बार एक बहुत बलशाली मूषक ने पराशर ऋषि के आश्रम में उत्पात मचाना शुरू कर दिया! उसके इस उत्पात से ऋषि के अन्न भंडार नष्ट हो गए! उसने सभी वस्त्र और मिट्टी के बर्तनों में भी छेद कर दिए! ऋषि ने भगवान् गणेश की आराधना की ! भगवान् ने प्रसन्न होकर उस मूषक को सबक सिखाना तय किया! गणेश जी ने अपना पलाश फेंका जो की मूषक को घसीट कर उनके सामने ले आया! भगवान् गणेश ने मूषक को चेतावनी दी कि तुमने ऋषि को बहुत परेशान किया जिसकी सजा तुम्हे  मिल के रहेगी परन्तु तुम मेरी शरण में हो इसलिए मैं तुम्हारी रक्षा भी करूँगा, मांगों तुम्हे क्या चाहिए ! मूषक का अहंकार फिर भी समाप्त नहीं हुआ वह बोला मैं आपसे कुछ नहीं मांगूंगा बल्कि आप मुझसे मांगों आपको क्या चाहिए! भगवान् गणेश चूहे की इस बात पर थोडा हँसे, फिर बोले की मुझे तुम्हे अपना वाहन बनाना है! ये सुनकर मूषक ने तथास्तु कहा और इस तरह गणेश जी मूषक पर बैठ गए! मूषक उनका भार सहन नहीं कर पाया! मूषक को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने गणेश जी से माफ़ी मांग ली! मूषक ने गणेश जी से कहा की वो अपना भार थोडा कम कर ले जिससे कि वह उनका वजन सहन कर पाए! गणेश जी ने अपना वजन कम कर लिया! तभी से मूषक को गणेश की का वाहन माना जाने लगा!

इस तरह मूषक भगवान् गणेश का वाहन माना जाने लगा! आप भगवान् गणेश की हर प्रतिमा में मूषक को उनके चरणों में विराजमान देख सकते है ! मूषक भगवान् की सेवा करते हुए दिखाई देगा!

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