चंद्रघंटा – माता का अनुखा स्वरूप

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सनातन धर्म के त्यौहारो में से एक त्यौहार नवरात्रि का है जिस में शक्ति पुजा का अनुखा महत्व है। इन नव रात्रियों में भक्तगण माता दुर्गा के विविध स्वरूपो की पुजा करते है और अपने सुख, शांति एवं समृध्धी की कामना करते है। माता के इन स्वरूपो की पुजा से उन की कामना पुर्ण होती है। नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा के स्वरूप को पुजने की बडी महत्ता है। माता का ये स्वरूप बडा ही शांत और नयन रोचक है। माता सोने की भांती तेजोमय प्रतित होती है। माता के इस रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है जिस से इस स्वरूप को चंद्रघंटा कहा जाता है।

स्वरूप:

इस स्वरूप के पुजन से भक्तो को सांसारीक बाधाएं और समस्याओ से समाधान मिलता है। इस रूप में माताका मुख की सुर्य की भांति प्रकाशित है और कांति छीटक रही दीखती है। उन का वाहन सिंह है और मंद मंद हास्य एक अलग ही प्रतिभा प्रतित कराती है। माता के दस हाथ विविध आयुधो से सज्ज है और ये स्वरूप इसीलिये युध्ध के लिये भी प्रतिकात्मक है। मां का ये स्वरूप बडा ही मोहक और शांतिप्रद है जो की साधक को निर्भय बनाता है और कार्य के प्रति अग्रेसर रहने की प्रेरणा देता है। उन के इस स्वरूप को पुजने से साधको को बडा ही फ़ायदा होता है। जो साधक सिध्धी प्राप्त करना चाहए है उन्हे इस स्वरूप को पुजने समय बडा ही सावधान रहना होता है।

पुजन:

माता के इस स्वरूप का पुजन नवरात्रि की तीसरी रात्रि को किया जाता है। जो साधक कुंडलिनी जागृत करना चाहते है उन के लिये इस स्वरूप की पुजा का बडा ही महत्व है क्युं की माता के इस स्वरूप को पुजने से मणिपुर चक्र में प्रविष्ट किया जा सकता है जो की शक्ति प्राप्त करने का एक नया आयाम है। माता के इस स्वरूप की पुजा से भक्तो के सारे कष्ट नाश होते है और समृध्धी की प्राप्ति होती है। जो भक्त इस स्वरूप को सच्चे मन से पुजते है उन्हें दिव्य अनुभुति होती है और अलौकिक आनंद की भी प्राप्ति होती है। माता का ये स्वरूप बहुत ही मनोहर है पर साधको को साधना के समय बडा ही पवित्र होकर एक चित्त से पुजन करना होता है जिससे मनचाहा परीणाम प्राप्त किया जा सके।

जो साधक सही तरीके से मां के इस स्वरूप का पुजन कर लें उस के तन से एक अलग ही सुगंध का अनुभव किया जा सकता है और वो दुसरो से काफ़ी प्रभवशाली दीखता है। उस का मुख मंडल चमकीला और वाक्छटा अनुखी लगती है। वो लोगो को बडा ही आकर्षीत करता है और अत्यंत मनोहर दीखता है। अत: साधक को जिवन के  काफ़ी क्षेत्रो में सफ़लता मीलती है। माता के इन नव स्वरूपो में से इसीलिये इस स्वरूप की पुजा हर भक्त के लिये बडी ही जरुरी मानी जाती है। जो भक्त शक्ति अर्जित करना चाहते है या उस का आविर्भाव करना चाहते है उन के लिये माता चंद्रघंटा का पुजन और अर्चन बडा ही जरुरी और मंगलकारी माना जाता है। नित्य जिवन में तनाव से मुक्ति पाने हेतु माता के इस स्वरूप का पुजन जरूरी है।

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