राहु और केतु राक्षस है फिर भी हिन्दू धर्म में पूजे जाते है, क्यों ?

Rahu Ketu

राहू और केतु दोनों नवग्रह में शामिल किये जाते है! इन् ग्रहों का अन्य ग्रहों के सामान कोई धरातल और स्थान नहीं है इसीलिए इन्हें छाया गृह भी कहा जाता है! राहू  और केतु पहले एक ही हुआ करते थे जिनका नाम था राहू! राहू  के सम्बन्ध  में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं! और राक्षस योनी से होने बावजूद भी इन्हें पूजा जाता है लेकिन ऐसा क्यों है आइये जानते हैं!

पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरन्य कश्यप की पुत्री सिंहिका ने अपने पति विचारित के सह्सवास से सौ पुत्रो को जन्म दिया राहू उनमे सबसे बड़े थे!

समुद्र मंथन में जब सभी राक्षसों ने भाग लिया तब राहू भी सम्मिलित हुए! समुद्र मंथन के चौदह रत्नों में से एक अमृत भी था! उसी समय भगवान विष्णु ने मोहिनी नामक सुन्दर स्त्री का रूप धारण किया! तो उन्होंने देवता और राक्षसों से कहा कि अमृत पान में से उन्हें ऊपर का भाग पीना है या नीचे का! ऊपर वाला भाग दिखने में अधिक पतला लग रहा था! ये देखकर राक्षसों ने बोला की उन्हें नीचे का भाग पीना है!इस प्रकार मोहिनी रुपी विष्णु भगवान् देवताओं को अमृत पिलाने लगे उन्हें ये ज्ञात था कि निचे वाले भाग में विष ही शेष बचेगा! राहू को इस बात का पता लग गया और  वह वेश बदल कर देवताओं के साथ अमृत पिने के लिए पंक्ति में लग गया! जब राहू को मोहिनी रुपी विष्णु भगवान् अमृत पिला रहे थे तो उन्हें यह ज्ञात हो गया की यह देवता नहीं अपितु राहू है!

तब तक राहू के शरीर में अमृत की एक बूंद चली गयी थी और राहू अमर हो गया! इस बात पर क्रोधित होकर विष्णु भगवान् ने राहू का सिर अपने सुदर्शन चक्र से काट दिया और उसका सिर अलग और धड अलग हो गया! राहू अमृत पान  करने से अमर हो गया था इसलिए उसकी म्रत्यु नहीं हुई!

यह होने के बाद राहू अत्यधिक क्रोधित होने लगा तथा उत्पात मचाने लगा इसे देख के विष्णु भगवान् ने उसे नवग्रह में शामिल होने तथा उन्ही की तरह प्रत्येक शक्ति व विश्व में उनकी पूजा होने का वरदान दिया!

एक मनुष्य के जीवनकाल तथा घटनाओ पर इन् नवग्रहों का अत्यधिक प्रभाव होता है! ये नवग्रह ही उसके जीवन की सभी घटनाओं को तय करते है तथा उसके कर्मो के अनुसार उसे फल देते है! राहू और केतु दो अलग गृह माने जाते है राहू का अपना कोई राशि  नहीं है इसलिए वह जिस भी गृह के साथ बेठता है तीन कार्य करता है

-यह उस गृह की समस्त शक्तियां ख़तम कर देता है !

-वह उस गृह की शक्ति स्वयम ले लेता है!

-वह उस गृह से मिलने वाले फलो के लिए व्यक्ति को बहुत संघर्ष करवाता है और बाद में सफलता देता है !

राहू और केतु की पूजा करना अत्यंत आवश्यक है उनकी प्रयाप्त पूजा करने से राहू और केतु व्यक्ति को संघर्षो का सामना करने से बचा लेते है! राहू और केतु को शांत रखने के लिए ही उनकी पूजा की जाती है! हर व्यक्ति अपने जीवन में शांत और सक्षम रहना चाहता है राहू और केतु की पूजा करने से वह अपना जीवन बिना किसी कष्ट के बिता सकता है!

Categories: Hindu Spiritual
Web Title : राहु और केतु राक्षस है फिर
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