शैलपुत्री: माता दुर्गा का एक सौम्य स्वरुप

Size: 1280x720 PX   Download   |  
Apply frame

Share Link:

HTML Code:

हिन्दु पुराणो के अनुसार नवरात्री एक शक्ति की आराधना का पर्व है जब माता दुर्गा के विविध स्वरूपो को पुजा जाता है। हर रात्री माता का एक अलग स्वरूप होता है जिसकी भक्तगण आराधना करते है। इस में सबसे प्रथम रात्री को माता दुर्गा का शैलपुत्री स्वरूप है, जिस की आराधना की बडी महीमा है। माता दुर्गा के इस स्वरूप को सौम्य स्वरूप भी कहा जाता है क्युं की इस स्वरूप में माता स्थिर मुद्रा में भक्तो को आशीष प्रदान करती हुई देखी जा सकती है। नवरात्री के प्रथम दिन माता के इस स्वरूप की पुजा करने से काफ़ी लाभ अर्जित किये जा सकते है और इसी लिये संसारी और योगी दोनो प्रकार के लोग इस स्वरूप की महीमा का गान करते है।

नामाभिधान एवं उत्पति:

पुराणो के अनुसार दुर्गा माता का ही एक स्वरूप पुरातन काल में था, जिसका नाम सती था और वो दक्ष प्रजापति की पुत्री थी। उन का विवाह शिवजी के साथ हुआ था। एक बार सती माताको पता चला की उनके पिता एक बहुत बडा यज्ञ करने जा रहे है और उस में सभी देवी देवताओ को आमंत्रित किया गया है। माता, पिता एवं परीवारजनो को मिलने की उनको बडी इच्छा हुइ और उन्हों ने शिवजी से पिता के वहां जाने की अनुमती चाही। शिवजी ने उन्हें समजाया की वहां आमंत्रण नही होने से वे ना जाये पर सती माता की प्रबल इच्छा को देखते उन्हों ने अनुमती दी। जब माता सती पिता के वहां पहुंची तो ना तो उन्हें कोइ आतिथ्य मिला और ना ही मान। पिता ने भी सती माता को देखकर शिवजी को कुछ कटुवचन कहे जो की सती माता सहन न कर सकी और योग अग्नी को प्रगट करके अपना शरीर अग्नि के हवाले कर दीया। यह पता चलते ही शिवजी अति क्रोधित हुए और उन्होनें यज्ञ का विध्वंस कर दिया। यही सती माता ने अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के वहां अवतार लीया और माता पार्वती के रूप में शिवजी को प्राप्त किया। पर्वत को शैल भी कहा जाता है और उस की पुत्री होने से माता के इस स्वरूप को शैलपुत्री कहा जाता है।

माता के अन्य स्वरूपो में यह सबसे शांत स्वरूप है और इसलिये योगी भी अपनी साधना की शुरुआत नवरात्री के प्रथम दिन, माता शैलपुत्री की पुजा करके करते है।

स्वरूप:

माता इस स्वरूप में सफ़ेद वस्त्रो में सज्ज है और उन के एक हाथ में त्रिशुल है और एक हाथ में कमल है। माता शैलपुत्री अनंत शक्ति की स्वामिनी मानी जाती है, इसलिये उन का स्थान सब दिनों में प्रथम है। माता के इस स्वरूप में उनका वाहन वृषभ है। माना जाता है की माता के इस स्वरूप को घी अति प्रिय होता है और इसीलिये प्रथम दिन को माता को भक्तो के द्वारा घी चढाया जाता है और माता के चरणो पर घी का लेप किया जाता है। इस दिन माता की भक्ति करने से मुलाधार चक्र जागृत होता है। अत: कुंडलिनी जागृत करने के वांच्छुको में भी इस दिन का और माता की भक्ति और पुजा आदी क्रियाओं का एक अलग ही महीमा होता है।

माँ शैलपुत्री की आराधना का मंत्र

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

शैलपुत्री मंत्र जाप के फायदे

नवरात्रि के दौरान शैलपुत्री मंत्र पाठ और जाप करने से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराई दूर रखती है और आपको स्वस्थ, अमीर और समृद्ध बनाती है।

माँ शैलपुत्री की आरती

Navratri greeting pics with goddess Shailputri aarti

Navratri greeting pics with goddess Shailputri aarti wallpaper

माँ शैलपुत्री फोटो गैलरी

Goddess Shailputri images, HD wallpaper free download

Goddess Shailputri images, HD wallpaper free download

Maa Shailputri photos

Maa Shailputri photos, HD full size images decorated with beautiful background download to share festival wishes.

maa shailputri photo

Maa Shailputri HD pic

Maa Shailputri HD pic, full size wallpaper to share festival greeting with your friends,

About the Designer

Gajendra is an energetic web designer and developer with 10 years of experience in creating and maintaining functional, attractive website. He has clear understanding of modern technologies and best design practices. Gajendra has a good experience with Word Press, Magneto and Shopify.

More Wallpaper

Write a Review