नारद जी ने विष्णु भगवान को स्त्री वियोग का श्राप क्यों दिया था?

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  • a. विष्णु भगवान ने नारद जी को राक्षस का रूप देकर स्वयंवर में भेज दिया था
  • b. विष्णु जी ने नारद ऋषि को अपना रूप देकर स्वयंवर में भेजा था
  • c. विष्णु जी ने नारद जी को बंदर का रूप देकर स्वयंवर में भेज दिया था
  • d. नारद मुनि विष्णु जी को नीचा दिखाना चाहते थे

Answer summary

एक समय नारदजी हिमालय पर्वत की कंदरा में घोर तपस्या कर रहे थे। नारद जी की तपस्या से इंद्र भगवान विचलित हो गए। इंद्र को अपना देवराज का पद छीनने का भय सताने लगा। इंद्र ने कामदेव की मदद से नारद जी की तपस्या में बाधा डालने की नाकाम कोशिश की। कामदेव नारदजी की तपस्या क्षेत्र में गए और वहां तपस्या को प्रभावित करने का हर संभव प्रयास किया। लेकिन नारदजी में लेशमात्र भी विकार पैदा नहीं हुआ। नारदजी उसी क्षेत्र में तपस्या कर रहे थे जहां पर शिवजी ने कामदेव को भस्म किया था। वह संपूर्ण क्षेत्र काम के प्रभाव से मुक्त था। जब इंद्र को कामदेव की असफलता का समाचार मिला तो वह नारद ऋषि के पास गए और नारद जी की प्रशंसा करने लगे। इंद्र की प्रशंसा से नारदजी में गर्व का भाव जागृत हो गया और वह अपने आप को काम जीत मानने लगे। वह शिवजी के पास जाकर अपने कामजित होने की गाथा सुनाने लगे। शिवजी ने नारद जी को आत्म प्रशंसा न करने का सुझाव दिया। लेकिन नारदजी अहंकारवश ब्रह्मा के पास पहुंच गए। वहां भी उन्होंने काम विजय की गाथा सुनाइ। इस प्रकार नारद जी के मन में काम विजय होने का अहंकार पूर्ण रुप से भर गया। इसके बाद विष्णु लोक में भी अपनी कहानी सुनाई।

नारद जी का अहंकार इतना बढ़ चुका था कि उसका नाश होना आवश्यक था। अतः विष्णु ने नारद जी के मोह व अहंकार के नाश के लिए योजना बनाई। विष्णु जी ने नारद जी के मार्ग में एक सुंदर नगर बसाया और वहां के शासक सीलनिधि द्वारा अपनी सुंदरी पुत्री का स्वयंवर करवाया। नारद जी वहां पहुंचे तो उस कन्या ने उन्हें प्रणाम किया। कन्या को देखते ही नारदजी उसपर मुग्ध हो गए। नारदजी उसे प्राप्त करने के लिए व्याकुल हो गए। इस कार्य को संपन्न करने के लिए नारदजी विष्णु का रूप लेने उनके पास गए और उस कन्या से शादी करने की इच्छा व्यक्त की। तब विष्णु जी ने नारद जी को बंदर का रूप देकर उनका मोह भंग करने के लिए उन्हें स्वयंवर में भेज दिया।

नारदजी स्वयवर स्थल पर पहुंच गए। शिव जी की माया की वजह से सभी उपस्थित राजाओं ने नारद जी को उनके वास्तविक रूप में ही देखा। लेकिन शिवजी के दो गण वहां ब्राह्मण के भेष में थे। वह नारद जी का उपवास करने लगे। जब कन्या वरमाला हाथ में लिए वहां उपस्थित हुई तो वह नारद जी को देखकर अत्यंत दुखी हो रही थी। उसने जैसे ही विष्णु को एक राजा के रूप में द्वार पर देखा तो उनके गले में माला डाल दी। यह देख नारदजी बहुत दुखी हुए। शिवगणों के कहने पर नारद जी ने अपना जल में प्रतिबिंब देखा। नारद जी को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने विष्णु जी को स्त्री वियोग से दुखी होने का श्राप दे दिया।
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Tags: Lord Vishnu Categories: Religious Quiz